Friday, May 28, 2010

mai hu beti.....


श्राप समझकर मार दिया
क्यों दुनीया ने ठुकरा दिया
क्या
जुर्म मेरा,क्या गुनाह किया
फ़ीर दोष ये दुनीया इसीलिए है देती
क्योकी में हु एक बेटी
सारे
जुर्म ,दुःख हु सहती सब कुछ सहकर भी
कीसी से कुछ ना कहती
फ़ीर
दोष ये दुनीया इसीलिए है देती
क्योकी में हु एक बेटी
कन्या
भ्रूण हत्या को रोकिये
"क्यूँकी
बेटी होना कोई पाप नहीं
वरदान
है ये अभिश्राप नहीं...."


सरगम......:)

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